“जो भाग रह जाए, वह प्रधान को मिले। पवित्र अर्पण किए हुए भाग के, और नगर की विशेष भूमि के दोनों ओर अर्थात् उनके पूर्व और पश्चिम की ओर के पच्चीस पच्चीस हज़ार बाँस की चौड़ाई के पास, जो और गोत्रों के भागों के पास रहे, वह प्रधान को मिले। अर्पण किया हुआ पवित्र भाग और भवन का पवित्रस्थान उनके बीच में हो।
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