“हे सारे पलिश्तीन, तू इसलिये आनन्द न कर कि तुझे मारनेवाली लाठी टूट गई, क्योंकि सर्प की जड़ से एक काला नाग उत्पन्न होगा, और उसका फल एक उड़नेवाला और तेज विषवाला अग्निसर्प होगा।