कुछ समय के बाद अर्थात् दो वर्ष के अन्त में उस रोग के कारण उसकी अँतड़ियाँ निकल पड़ीं, और वह अत्यन्त पीड़ित होकर मर गया। उसकी प्रजा ने जैसे उसके पुरखाओं के लिये सुगन्धद्रव्य जलाया था, वैसा उसके लिये कुछ न जलाया।