तब मेढ़े को संस्कार–वाला जानकर उसमें से चरबी और मोटी पूँछ को, और जिस चरबी से अंतड़ियाँ ढपी रहती हैं उसको, और कलेजे पर की झिल्ली को, और चरबी समेत दोनों गुर्दों को, और दाहिने पुट्ठे को लेना,