तब उसने अपने मन का सारा भेद खोलकर उससे कहा, “मेरे सिर पर छुरा कभी नहीं फिरा, क्योंकि मैं माँ के पेट ही से परमेश्वर का नाज़ीर हूँ, यदि मैं मूँड़ा जाऊँ, तो मेरा बल इतना घट जाएगा कि मैं साधारण मनुष्य के समान हो जाऊँगा।”